एक अधूरी कविता ...
मेरे आँखों में तैरती तेरी जुदाई की नमी
साँसों में महकती तेरी उम्मीद की आरज़ू
गुजरते हुए लम्हे तेरे नाम करने की तमन्ना
चाहत की कशिश गहरी और बस तेरी जुस्तजू
इन सब के साथ मै चले जा रहा हूँ
फिर से जिंदगी के तराने बुने जा रहा हूँ
तू दूर बैठी है कहीं पर मेरे गीत तेरे हैं
हर पल तेरे इश्क का क़र्ज़ सा लगता है
मालूम है की हाल तेरा भी कुछ ऐसा है
एक दुसरे पे मर मिटना फ़र्ज़ सा लगता है
सब लिए अपने साथ मै चला जा रहा हूँ
फिर से जिन्दगी के तराने बुने जा रहा हूँ
अब सब कुछ जीतने की इच्छा है
सब कुछ पा लेने का वादा और हसरत
सब कुछ सजा के सौप देने के ख्वाब
बंदिशें तोड़ कर तुझे अपनाने की चाहत
सारे ख्वाब चाहत से समेटे जा रहा हूँ
फिर से जिन्दगी के तराने बुने जा रहा हूँ

Comments
Post a Comment